सोमनाथ मन्दिर का इतिहास कब किसने तोड़ा और कब किसने बनवाया

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सोमनाथ मन्दिर
सोमनाथ मन्दिर

सोमनाथ मन्दिर का पुनर्निर्माण इतिहास

 

सोमनाथ मंदिर की स्थापना कब हई और किसने कराई इसकी कोई सटीक जानकारी तो मिलती नहीं है।

इसके उपलक्ष्य में कई धार्मिक कथाएं भी प्रचलित हैं। लेकिन यह मंदिर ईसा पूर्व से ही अस्तित्व में है। इसके कई प्रमाण मिलते हैं।

मान्यता है कि सोमनाथ मन्दिर का पुनर्निर्माण 7 वीं सदी के वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं द्वारा 649 ईस्वी में करवाया था।

 सोमनाथ मन्दिर
सोमनाथ मन्दिर

इस मंदिर को पहली बार 725 ईस्वी में सिन्ध के मुस्लिम सूबेदार अल जुनैद ने तुड़वा दिया था। इस वैभवशाली मन्दिर को तोड़कर मंदिर की सारी धन सम्पदा लूट ली थी।

तदोपरांत इस मंदिर का तीसरी बार निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में करवाया था।

 

महमूद गजनवी की लूट

तब तक इस वैभवशाली सोमनाथ मन्दिर की भव्यता और धन संपदा की कीर्ति दूर दूर तक फैल चुकी थी।

अरब यात्री “किताबुल हिन्द” का लेखक “अल- बरूनी” गजनवी का दरबारी कवि था।

“तहकीक- ए- हिन्द” में भारत का विवरण लिखा है।

इसी अल – बरुनी ने सोमनाथ मन्दिर का वख्यान महमूद गजनवी से किया था।

जिसकी सोहरत से प्रभावित हो कर महमूद गजनवी ने सन 1024 में, इस मन्दिर को लूटने के इरादे से 5000 सैनिकों के साथ आक्रमण कर दिया।

और इस मन्दिर में पूजा अर्चना कर रहे हजारों भक्त एवं हजारों गांव वाले इस आक्रमण में निहत्थे मारे गए थे।

यह हमला भारत के इतिहस में बहुत चर्चित रहा है।

जब महमूद गजनवी मन्दिर की धन संपदा लूट कर ऊंट, घोड़े और हाथियों पर लादने के बाद भी आधे से ज्यादा धन बच गया था।

हजारों हिन्दुओं की हत्या कर उनकी हजारों महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाने के मकसद से ले गया।

 सोमनाथ मन्दिर
सोमनाथ मन्दिर

जाटों का आक्रमण

जब इस बात की खबर जब मालवा के पंवार वंश के राजा भोज को लगी।

तब राजा भोज ने महमूद गजनवी को सबक सिखाने के लिए। रास्ते की घेरा बन्दी कर ली।

लेकिन इस योजना की भनक गजनवी को लग गई। और उसने कच्छ का रास्ता बदल कर सिंध की ओर से जाने का फैसला किया।

लेकिन इस बात की भनक सिंध के जाट राजा भीमसेन को लग गई। उन्होंने जाट सेना के साथ महमूद गजनवी पर भयंकर आक्रमण किया।

इस युद्ध में गजनवी की बहुत बुरी हार हुई थी। आधी सेना मारी गई और आधी भाग गई गजनवी भी अपने प्राण बचाने में सफल हो गया।

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लेकिन जाटों ने महिलाओं बच्चों और मन्दिर का धन छीन लिया।

और सोमनाथ मन्दिर का ऑटोमेटिक दरवाज़ा भी जो आज भी आगरा में पड़ा हुआ है।

क्योंकि मन्दिर के पुजारियों ने उस दरवाजे और धन को अपवित्र बता कर लेने से मना कर दिया था।

उसके बाद गजनवी ने भारत पर आख़िरी हमला किया था।

जिसमें जाटों की हार हुई थी। इस पर हम किसी और लेख में प्रकाश डालेंगे…

इस आत्मघाती आक्रमण का जिक्र समकालीन इतिहासकारों ने अपनी अपनी किताबों में किया है।

इतिहसकार “उतबी” ने अपनी किताब “यामिनी” में और “सर हेनरी इलियट” ने भी इसका वर्णन विस्तार पूर्वक किया है।

 सोमनाथ मंदिर के सौन्दर्यीकरण

महमूद गजनवी के मंदिर तोड़ने और लूटने के बाद गुजरात के राजा भीमदेव और मालवा के राजा भोज ने इस मन्दिर का पुनर्निर्माण चौथी बार करवाया।

1093 में सिद्धराज जयसिंह ने भी मंदिर निर्माण में सहयोग दिया।

1168 में विजयेश्वर कुमारपाल और सौराष्ट्र के राजा खंगार ने भी सोमनाथ मंदिर के सौन्दर्यीकरण में महत्वूर्ण योगदान दिया।

लेकिन मन्दिर को लूटने का सिलसिला यहीं नहीं रुका इस बार सन् 1297 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का सेनापति नुसरत खां ने गुजरात पर आक्रमण किया।

तब उसने गुजरात पर अपना आधिपत्य स्थापित कर सोमनाथ मंदिर को तोड़ दिया।

मुख्य शिवलिंग को भी खंडित किया और सारी धन-संपदा को भी लूट कर ले गया।

सोमनाथ मंदिर को पांचवीं बार फिर से हिन्दू राजाओं ने बनवा दिया।

फिर सन् 1395 में गुजरात के सुल्तान मुजफ्‍फरशाह ने मंदिर को फिर से तुड़वाकर लूट लिया।

उसके बाद 1412 में उसके पुत्र अहमद शाह ने भी मन्दिर को लूटा।

अब इस मन्दिर पर औरंगजेब की नज़र पड़ गई थी। औरगज़ेब ने भी सोमनाथ मंदिर को दो बार तुड़वा कर लूट लिया।

पहली बार सन् 1665 में और दूसरी बार सन् 1706 में। इसके बाद भारत का एक बड़ा हिस्सा मराठों के अधिकार क्षेत्र में आ गया था।

तब सन् 1783 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई देवी ने सोमनाथ मन्दिर को फिर से बनवा दिया।

 सोमनाथ मन्दिर
सोमनाथ मन्दिर

भारत के पहले ग्रह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल

धीरे धीरे भारत मै अंग्रेज़ो का राज आ गया था। अंग्रेज़ भी मन्दिर लूटने की परम्परा बखूबी निभाते रहे।

आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने जूनागढ रियासत को 9 नवम्बर 1947 को भारत में मिला लिया।

एक बार फिर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मन्दिर का जीर्णद्धार सन् 1950 में आरम्भ करवाया।

सन् 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद जी ने सोमनाथ मन्दिर में ज्योतिर्लिंग की स्थापना की।

सन् 1962 को सोमनाथ मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ मन्दिर को कैलाश महामेरू प्रासाद शैली में बन वाया गया है।

इस समय जो सोमनाथ मन्दिर स्थापित है। उसे भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने बनवाया है।

और 1 दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा जी ने सोमनाथ मन्दिर राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

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